गेहूं फसल कटाई उपरान्त बचे हुए फसल अवशेषों को न जलाएं किसान : खंड कृषि अधिकारी

Indri  खंड कृषि विभाग के कार्यालय में खंड के कृषि अधिकारियों एवं कर्मचारियों की फसल अवशेषों को आग न लगाने से संबंधित खंड कृषि अधिकारी डॉ. अश्वनी कुमार की अध्यक्षता में बैठक का आयोजन किया गया।
बैठक में खंड कृषि अधिकारी डॉ. अश्वनी कुमार ने कृषि अधिकारियों एवं कर्मचारियों को निर्देश दिए कि वे गांवों में जाकर किसानों को जागरूक करें कि वे फसल अवशेषों को आग न लगाए। फसल अवशेेष जलाने से हमारी उपजाऊ जमीन की उर्वरा शक्ति एवं पर्यावरण को हानि पहुंचती है और साथ ही खेतों में मित्रों कीटों को नुकसान पहुंचता है। फसल अवशेष जलाने से भूमि की उर्वरा शक्ति कम होने के साथ-साथ भूूण्डलीय तापमान में बढौत्तरी होती है(फसल अवशेेष जलाने से हमारी उपजाऊ जमीन की उर्वरा शक्ति एवं पर्यावरण को हानि पहुंचती है। उन्होंने ने बताया कि हरियाणा सरकार फसल अवशेष प्रबंधन हेतु मशीनों पर सब्सिडी दे रही है।  उन्होंने ने किसानों से आह्वान किया कि वे गेहूं फसल कटाई उपरान्त बचे हुए फसल अवशेषों को न जलाएं बल्कि जमीन में मिलाकर भूमि की उर्वरता शक्ति को बढाएं। उन्होंने बताया कि यदि कोई किसान गेहूं की फसल काटने के उपरांत फसल अवशेषों में आग लगाता हुआ पाया गया तो उस किसान के विरूद्घ भारतीय दण्ड संहिता की धारा-188 आईपीसी एवं संपठित वायु प्रदूषण नियंत्रण अधिनियम 1981 के तहत कार्यवाही अमल में जाएगी।
खंड कृषि अधिकारी ने बताया कि किसान 15 मई से पहले धान की बिजाई न करें और न ही अपने खेत में 15 जून से पहले धान की रोपाई करें। उन्होंने बताया यदि कोई किसान समय से पहले धान की बिजाई एवं रोपाई करता हुआ पाया गया तो उस किसान के विरूद्घ *दी हरियाणा प्रीजरवेंशन ऑफ सब-सोयल वाटर अधिनियम नम्बर-6 ऑफ 2009* की उल्लघंना करने पर प्रशासनिक व न्यायिक कार्यवाही अमल में लाई जाएगी। उन्होंने सभी किसानों से अपील की कि वे 15 मई से पहले धान की बिजाई एवं 15 जून से पहले धान की रोपाई न करें और न ही फसल अवशेषों को आग लगाए। 


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